प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए रेलवे की खास सुविधा, लोअर बर्थ से लेकर टीटीई की मदद तक जानें जरूरी नियम

नई दिल्ली: गर्भावस्था के दौरान ट्रेन से लंबी दूरी का सफर करना कई महिलाओं के लिए मुश्किल हो सकता है. खासकर अपर या मिडिल बर्थ पर चढ़ने-उतरने में परेशानी होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ को प्राथमिकता देने की व्यवस्था रखता है, ताकि सफर के दौरान उन्हें ज्यादा परेशानी न हो.

किस कोच में कितनी लोअर बर्थ की व्यवस्था

गर्भावस्था के दौरान ऊपर की बर्थ पर चढ़ना कई महिलाओं के लिए असुविधाजनक हो सकता है. इसलिए रेलवे के कुछ कोच में गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ निर्धारित की जाती हैं. इससे उन्हें बैठने और सोने में आसानी रहती है और वॉशरूम जाने के लिए बार-बार ऊपर-नीचे चढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती.

दी गई जानकारी के मुताबिक, स्लीपर कोच में करीब 6 से 7 लोअर बर्थ, थर्ड एसी में करीब 4 से 5 और सेकंड एसी में करीब 3 से 4 लोअर बर्थ गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित रहती हैं. हालांकि, लोअर बर्थ मिलना ट्रेन और उस समय उपलब्ध सीटों पर निर्भर करता है.

लोअर बर्थ पाने के लिए क्या करना होगा

गर्भवती महिला टिकट बुक करते समय रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम यानी PRS काउंटर का इस्तेमाल कर सकती है. टिकट बुकिंग के दौरान गर्भावस्था की जानकारी देने पर लोअर बर्थ के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है. हालांकि, बर्थ का आवंटन उपलब्धता और रेलवे की व्यवस्था के अनुसार होता है.

टिकट बुक करते समय लोअर बर्थ नहीं मिले तो

कई बार टिकट बुक कराने के समय सभी उपलब्ध लोअर बर्थ पहले ही बुक हो चुकी होती हैं. ऐसी स्थिति में ट्रेन में सफर के दौरान गर्भवती महिला अपनी परेशानी टीटीई को बता सकती है. अगर ट्रेन में कोई लोअर बर्थ उपलब्ध होगी, तो टीटीई नियमों के अनुसार मदद कर सकता है.

सफर से पहले इन बातों का रखें ध्यान

गर्भवती महिलाओं को ट्रेन का टिकट बुक करने से पहले लोअर बर्थ की उपलब्धता और लागू रेलवे नियमों की जानकारी लेनी चाहिए. यात्रा के दौरान अपनी सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है. खासकर लंबी दूरी के सफर में बर्थ से जुड़ी जानकारी पहले से होने पर यात्रा को ज्यादा आरामदायक बनाया जा सकता है.

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